छत्तीसगढ़: जांच के बाद दूध पिलाये

Saturday, July 9, 2016

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अमृत दूध-देवभोग

अम्बिकापुर | संवाददाता: मैनपाट में अमृत दूध के पैकेट पर कीड़े पाये जाने के बाद प्रशासन ने इसे पिलाने से पहले जांच करने के निर्देश जारी किये हैं. उल्लेखनीय है कि सात जुलाई को सरगुजा के मैनपाट में बच्चों को पिलाये जाने वाले दूध में कीड़े मिलने की शिकायत मिली है. उसके बाद से बच्चों के माता-पिता भी सतर्क हो गये हैं. बहरहाल, अंबिकापुर के जिला कलेक्टर भीम सिंह ने इस बारे में निर्देश जारी किये हैं. कलेक्टर भीम सिंह ने मुख्यमंत्री अमृत योजना के तहत आंगनबाड़ी के बच्चों को ‘‘देवभोग यूएचटी प्रोसेस्ड फ्लेवर्ड टोन्ड मिल्क’’ को पूरी जांच के बाद सही पाये जाने पर ही बच्चों को पिलाने के निर्देश दिए हैं.

उन्होंने कहा है कि पैकेट की पैकिंग एवं दूध की जांच के बाद यदि दूध सही पाया जाता है, तभी बच्चों को पिलाना है. उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रशिक्षित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दूध की पूरी जांच के बाद ही उपयोग करने के निर्देश दिए हैं.

आंगनबाड़ी केन्द्र में दूध के पैकेट की शिकायत पाए जाने पर कार्यक्रम अधिकारी चंद्रबेश सिसोदिया ने बताया कि 8 जुलाई को मैनपाट परियोजना में प्राप्त दूध के बैच नंबर सीडीएफ029 ए के चार पैकेट, सीडीएफ029 बी के दो पैकेट लिकेज वाले तथा सीडीएफ029 ए का एक पैकेट फूला हुआ पाया गया. मीठा दूध लिकेज के कारण बाहर आने पर पैकेट के बाहर कीड़े लग जाते हैं. इन पैकेट्स को पंचनामा तैयार कर नष्ट कर दिया गया.

जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों का प्रशिक्षण
गौरतलब है कि 10 जून 2016 को जनप्रतिनिधियों, मीडिया के प्रतिनिधियों, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा चिकित्सा अधिकारियों को जिला कार्यालय के सभाकक्ष में दूध के पैकेट की पूरी जांच एवं गुणवत्ता जांच करने के संबंध में प्रशिक्षित करते हुए दूध का सेवन भी कराया गया था. इस दौरान स्पष्ट तौर पर बताया गया था कि दूध के पैकेट में अत्यधिक हवा भरने के कारण फूल जाने एवं सुई की नोंक के छिद्र के कारण भी पैकेट के लिकेज होने पर उस दूग्ध का सेवन नहीं करना है. इसके साथ ही बच्चों को पिलाने से पूर्व दूध के स्वाद की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. दूध के पैकेट को सूखे एवं सामान्य तापमान में रखने हेतु निर्देशित किया गया है. दूध को गर्म करने एवं फ्रीज में रखने से भी मना किया गया है.

दूध पिलाने से पूर्व करनी होगी जांच
कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रबेश सिसोदिया ने बताया कि घर में उपयोग किये जाने वाले दूध को भी बेहतर तरीके से रखा जाता है, ताकि उसमें किसी प्रकार की खराबी न आ जाये. इसी प्रकार बच्चों को पिलाने के लिए मिलने वाले दूध के पैकेट की जांच भी पूरी सावधानी के साथ रखना होगा, ताकि पैकेजिंग एवं रख-रखाव के दौरान किसी तरह की खराबी आने पर संबंधित दूध का सेवन न कराया जाये. उन्होंने बताया है कि यू.एच.टी. विधि से निर्मित दूध की पैकेजिंग के दौरान पूरी सावधानी बरती जाती है तथा उसके गुणवत्ता की जांच भी की जाती है. इसके बावजूद भी संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को दूध पिलाने से पूर्व पैकेट की सूक्ष्मता से जांच करने के निर्देश दिये गये है.

चिकित्सीय परामर्श
जिला चिकित्सालय के चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशील एक्का एवं डॉ. के.पी. विश्वकर्मा द्वारा दूध पिलाने के संबंध में चिकित्सीय परामर्श दिया गया. उन्होंने बताया कि कुछ बच्चों को दूध पिलाने पर उल्टी, दस्त, पेट दर्द एवं पेट फूलने की शिकायत होती है, ऐसे बच्चों का चिन्हांकन कर उन्हें दूध नहीं देना चाहिए. जिन बच्चों के माता-पिता को दूध से एलर्जी है, ऐसे बच्चों को भी दूध देने में सावधानी बरतनी होगी.

दूध पैकेट की जांच
दूध के पैकेट को सामान्य तापमान, सूखे एवं स्वच्छ स्थान पर रखने, चूहे एवं कीड़े-मकोड़े से दूर रखने, दूध पिलाने हेतु साफ-सुथरा बर्तन एवं गिलास का प्रयोग करने, पिलाने से पूर्व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका द्वारा दूध को चखकर जांच करने, उल्टी, सिरदर्द, पेटदर्द एवं दस्त की शिकायत होने पर बच्चों को समीप के स्वास्थ्य केन्द्र में शीघ्र ले जाने के निर्देश दिये गये है.

दूध पैकेट खराब होने के लक्षण
दूध के पैकेट में लिकेज, रिसाव या हवा से फूल जाने पर वह उपयोग के लायक नहीं रहता. जिन बच्चों को दूध के प्रति एलर्जी अथवा अरूचि हो, उसे दूध नहीं पिलाने के निर्देश दिये गये है. बच्चों एवं पालकों को दूध के पीने के पहले और बाद में इमली, बासी चावल, नीबू, जंगली फल आदि नहीं खाने की समझाईश देने कहा गया है. पैकेट के खुलने के दो-तीन घण्टे बाद तथा पैकेट के उत्पाद तिथि से 90 दिनों बाद दूध का उपयोग नहीं करने निर्देशित किया गया है. तीन वर्ष से छोटे बच्चों को दूध नही पिलाने कहा गया है. दूध में लसलसापन, गांठ अथवा फटे होने पर दूध का प्रयोग नहीं करना है. दूध के पैकेट को सूर्य की रोशनी में सीधे रखने से मना किया गया है.

हेल्पलाईन नंबर
दूध पिलाने पर स्वास्थ्य से संबंधित किसी तरह की परेशानी होने पर चाईल्ड लाईन के टोल फ्री नंबर 1098 तथा संजीवनी 108 पर सम्पर्क किया जा सकता है. अम्बिकापुर क्षेत्र की समस्या के लिए मोबाईल नंबर 9617727367 पर, सीतापुर क्षेत्र में समस्या होने पर 9575351376 तथा उदयपुर क्षेत्र में समस्या होने पर 8120093877 पर सम्पर्क किया जा सकता है. महिला एवं बाल विकास के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री चन्द्रबेश सिसोदिया को भी उनके मोबाईल नंबर 7049927400 पर सम्पर्क कर सकते है. दूग्ध पैकेट के संबंध में जानकारी प्राप्त करने हेतु दूग्ध महासंघ के सरगुजा प्रभारी हेमसागर पटेल से उनके मोबाईल नंबर 8085732939 पर जानकारी प्राप्त की जा सकती है.

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