छत्तीसगढ़: अस्पताल पर 18लाख जुर्माना

Friday, August 21, 2015

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एंटीबायोटिक से प्रतिरोध क्षमता

दुर्ग | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के एक निजी अस्पताल पर मरीज को एक्सपायरी दवा देने से हुई मौत के लिये 18 लाख रुपयों का जुर्माना हुआ है. जिला उपभोक्ता फोरम ने दुर्ग के निजी अस्पताल चंदूलाल चंद्राकर अस्पताल प्रबंधन पर यह जुर्माना लगाया है. प्रबंधन को 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में अलग से पीड़ित को देने होंगे.

मिली जानकारी के मुताबिक 24 जनवरी 2014 को भिलाई निवासी 65 वर्षीय पूर्णिमा बाई को गंभीर हालत में चंदूलाल चंद्राकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मरीज को अगले ही दिन आईसीयू में में शिफ्ट करा दिया गया था. मरीज को 29 जनवरी को अचानक डिस्चार्ज कर दिया गया. जिसके अगले ही दिन मरीज की मौत हो गई थी.

करीब दो माह बाद जब पूर्णिमा बाई के परिजनों ने अस्पताल के द्वारा दी गई रसीद तथा दवाओं का अवलोकन किया तो पाया कि इनमें ज्यादातर दवाइयां और इंजेक्शन एक्सपायर हो चुके थे. परिजनों ने कलेक्टर जनदर्शन में इस बात की शिकायत की. कलेक्टर ने एक जांच समिति का गठन कर दिया. जिसकी रिपोर्ट में अस्पताल का पक्ष लिया गया.

इसके बाद असंतुष्ट परिजनों ने वकील के माध्यम से जिला उपभोक्ता फोरम में 28 अगस्त 2014 को वाद दायर कर दिया. गुरुवार को उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष मैत्रीय माथुर ने अपने फैसले में चंदूलाल चंद्राकर अस्पताल प्रबंधन पर 18 लाख का जुर्माना लगाया तथा मृतका के परिजनों को वाद व्यय के रूप में 10 देने का आदेश दिया.

उल्लेखनीय है कि पीड़ित उपभोक्ता सेवा या वस्तु में किसी भी तरह की शिकायत के लिए फोरम और आयोग में मामला दायर कर सकता है. फोरम या आयोग के दफ्तर में निश्चित प्रारूप में आवेदन देना होता है. इसका शुल्क बेहद नॉमिनल है. आवेदन के बाद ही दूसरे पक्ष को नोटिस दिया जाता है. इसके बाद फोरम केस दर्ज कर सुनवाई करता है. 20 लाख रुपयों तक के मामलों की सुनवाई जिला उपभोक्ता फोरम में तथा 5 करोड़ रुपयों तक की सुनवाई राज्य उपभोक्ता आयोग में होती है.

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