‘कीमोथेरेपी’ से ठीक होगा यूपी: नाइक

Thursday, August 21, 2014

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राम नाइक-राज्यपाल

लखनऊ | एजेंसी: यूपी के राज्यपाल राम नाइक का कहना है कि केमोथेरेपी से इसकी कानून-व्यवस्ता ठीक होगा. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और राजस्थान के कार्यवाहक राज्यपाल राम नाइक का कहना है कि उप्र की कानून-व्यवस्था कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की तरह बिगड़ चुकी है, और यह आसानी से ठीक होनी वाली नहीं है.

लंबे, बेदाग राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन के बाद उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के राज्यपाल बने राम नाइक एक विशेष बातचीत में कई मुद्दों पर खुलकर बातचीत की.

नाइक ने कहा, “राज्य की कानून-व्यवस्था उसी तरह बिगड़ चुकी है जैसे ‘कैंसर’ की बीमारी. इसे दुरुस्त करने के लिए ‘कीमोथेरेपी’ की तरह इलाज करना होगा. इसमें केन्द्र को भी सहयोग देना चाहिए. मैं इसके लिए केन्द्र और राज्य के बीच सेतु का काम करूंगा.”

एक सवाल के जवाब में नाइक ने कहा, “देश में पहले की अपेक्षा अपराध बढ़े हैं लेकिन उत्तर प्रदेश में कुछ ज्यादा ही बढ़ गए हैं. अखबार खोलते ही दुष्कर्म, हत्या, तनाव या संघर्ष की खबरें देखने पर दु:ख होता है.”

उन्होंने कहा, “मैं यहां 22 जुलाई को आया उसके बाद से जो प्रमुख घटनाएं हुई हैं या जो अधिक चर्चा में हैं उसके बारे में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लगातार संवाद कर रहा हूं. मोहनलालगंज की घटना पीड़ित परिजन मुझसे आ कर मिले. उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की, उनको कुछ मुआवजा दिया जाए, बच्चों की पढ़ाई कराई जाए, इस तरह की मांग मेरे पास आई, ये मांग मैंने मुख्यमंत्री तक पहुंचाई.”

नाइक ने आगे कहा, “सहारनपुर में सिख और मुसलमानों में संघर्ष हुआ, कर्फ्यू लगा वहां जांच करने की बात थी वह हुई. इस प्रकार से जो महत्वपूर्ण घटनाएं होती हैं उसके बारे में मुख्यमंत्री के साथ लिखित और मौखिक दोनों ही तरह से संवाद हमने रखा है. मुझे लगता है कि राज्यपाल की भूमिका यही है.”

राज्य में दो दर्जन से ज्यादा विश्वविद्यालयों के बावजूद उच्च शिक्षा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. इस सवाल पर नाइक ने कहा, “विश्वविद्यालयों का शिक्षा स्तर नीचे जा रहा है. यह विसंगति है, लेकिन सच्चाई है. उत्तर प्रदेश में 24 विश्वविद्यालय हैं. राज्यपाल ही उनका कुलाधिपति होता है, बाकी के कुलपति होते हैं. ऐसे विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ अलग-अलग, लगभग आधा-आधा घंटा प्रत्येक से मैंने छह-सात दिन में बातचीत की और समझने की कोशिश की कि उनकी कौन-सी कठिनाइयां हैं.”

उन्होंने कहा, “शिक्षा का स्तर बढ़ाने की दृष्टि से जो आवश्यक चीजें हैं उसपर मुख्यमंत्री के साथ व्यक्तिगत चर्चा करूंगा और उसमें से रास्ता निकालूंगा.”

उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय दलों के दबदबे पर नाइक ने कहा, “क्षेत्रीय पार्टियां देश की वास्तविकता हैं. इसे स्वीकार करना चाहिए. लोकसभा चुनाव में जनता ने राष्ट्रीय मुद्दों पर मतदान किया. इससे साबित होता है कि जनता राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हितों को अलग-अलग देखती है.”

नाइक ने 25 सितंबर, 2013 को कहा था कि वह अब कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे. इस घोषणा के बारे में उन्होंने कहा, “पांच बार सांसद रहा और केंद्र में पेट्रोलियम व रेल जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय भी संभाले. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में पांच मंत्रालयों का राज्यमंत्री रहा. 2004 से 2007 तक भाजपा की अनुशासन समिति का अध्यक्ष रहा, विकास प्रकोष्ठ का संयोजक रहा. काफी लंबी राजनीतिक पारी खेली है, अब दूसरों को मौका मिलना चाहिए.”

यह कम लोगों को पता होगा कि आज संसद में सत्रारंभ पर राष्ट्रगान और रत्रावसान पर राष्ट्रगीत गायन के पीछे नाइक की कोशिश रही है.

इस बारे में उन्होंने बताया, “1991 में संसद में केरल के विषय में एक सवाल पूछा गया था कि वहां के कुछ स्कूलों में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत नहीं गाया जाता है? तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह ने जवाब दिया-’हां सच है’. इसका कारण पूछा गया तो सरकार ने कहा – ‘संभवत: उपेक्षा’.”

उन्होंने कहा, “जवाब से मुझे संतुष्टि नहीं हुई और इस विषय पर आधा घंटे चर्चा कराने की मांग की. मन में एक ख्याल आया कि क्यों न संसद सत्र शुरू होने पर राष्ट्रगान हो और समापन पर राष्ट्रगीत सभी सांसदों द्वारा गाया जाए. चर्चा के बाद यह प्रस्ताव स्वीकार हो गया. इस उपलब्धि ने मुझे बहुत संतुष्टि प्रदान की.”

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