सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्रों को लैपटॉप नहीं

Sunday, April 14, 2013

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रमन सिंह लैपटॉप बांटते हुए

बिलासपुर | विशेष संवाददाता: राज्य सरकार की योजनाओं में जारी भेदभाव तब खुलकर सामने आया जब बिलासपुर की सेंट्रल यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को रमन सरकार की छात्रों को मुफ्त लैपटॉप व टैबलेट बांटने की महत्वकांक्षी छत्तीसगढ़ युवा सूचना क्रांति योजना योजना से दूर रखा गया. बी.टेक और बी.ई के इन छात्रों को लैपटॉप न बांटने के पीछे कारण उनका केंद्रीय यूनिवर्सिटी का छात्र होना बताया गया.

शनिवार को बिलासपुर के पाँच कॉलेजों में मुख्यमंत्री रमन सिंह ने लैपटॉप वितरित किए लेकिन सेंट्रल यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को इस कार्यक्रम से दूर ही रखा गया. ऐसे में आक्रोशित छात्रों ने अपनी यूनिवर्सिटी में इसके बाबत पूछताछ की तो उन्हें कहा गया कि यूंकि तुम सेंट्रल यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स हो इसलिए राज्य सरकार की लैपटॉप योजना का लाभ तुम्हें नहीं मिलेगा और तुम्हें इसकी शिकायत जिससे करनी है कर दो.

इन छात्रों का कहा गया कि आखि़र तुम्हें लैपटॉप क्यों मिले क्योंकि योजना राज्य सरकार की है और तुम सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पढ़ते हो. अगर फिर भी लैपटॉप लेना है तो केंद्र की एमएचआरडी विभाग से मांगो. लैपटॉप न मिलने बात सुन कर ये सभी छात्र भड़क गए और उन्होंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी के बीटेक विभाग में जमकर हंगामा मचाया.

इन छात्रों की निराशा इसीलिए भी ज्यादा है क्योंकि तकनीकी शिक्षा विभाग ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने लैपटॉप बांटने के लिए छात्रों के नाम की सूची कई दिनों पहले से मांगी थी. प्रबंधन ने इसके लिए दस दिनों में सारी आवश्यक्ताओं पूरी कर छात्रों के नामों की सूची तकनीकी शिक्षा विभाग को भिजवा दी थी. लेकिन ऐन समय पर इन छात्रों का नाम लैपटॉप पाने वालों की सूची से हटा दिया गया और इस बाबत जानकारी भी लैपटॉप प्रदान करने दिन ही दी गई.

इस बात को लेकर बाद में यूनिवर्सिटी प्रबंधन के अधिकारी और प्रोफेसर भी नाराज दिखे. क्योंकि शासन के कहने पर ही वे बीई और बीटेक अंतिम वर्ष के छात्रों की सूची बनाई थी और उसे भेजा गया था. उनके अनुसार अगर लैपटॉप देना ही नहीं था तो छात्रों की भावनाओं से ऐसा खिलवाड़ क्यों किया गया.

सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रभारी कुलसचिव प्रो. एमएसके खोखर का मामले के बारे में कहना है कि तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से छात्रों की सूची मांगी गई थी इसलिए भेज दिया गया था, लेकिन योजना में यहां के छात्रों को शामिल किया जाएगा इस बात को लेकर उन्हें पहले से ही संदेह था. क्योंकि योजना राज्य शासन की है और हमारी यूनिवर्सिटी केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संचालित है.

अपने साथ हुए ऐसे पक्षपातपूर्ण रवैये से ये छात्र बेहद मायूस हैं और राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ शिकायत मुख्यमंत्री रमन सिंह से करने की योजना बना रहे हैं.

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