बिलासपुर रेलवे में ठेंगे पर कैग

Tuesday, March 12, 2013

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रेलवे

बिलासपुर | विशेष संवाददाता: कैग द्वारा बिलासपुर रेलवे जोन में प्रदूषण को लेकर की गई आपत्ति के बाद भी रेल अफसर उदासीन हैं. कैग यानी भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में टिप्पणी की है कि बिलासपुर में रेलवे जिस तरीके से प्रदूषणयुक्त पानी अरपा नदी में बहाता है, वह खतरनाक है. लेकिन कैग की रिपोर्ट के बाद भी यह सिलसिला जारी है. खुली बोगियों में कोयला और दूसरे खनिजों के परिवहन पर भी कैग ने आपत्ति की है लेकिन बिलासपुर जोन में रेल अधिकारी कैग की रिपोर्ट को ठेंगे पर रख कर चल रहे हैं.

गौरतलब है कि 12 रेलवे जोनों के अलग-अलग रेलवे स्टेशनों में प्रदूषण का हाल जानने के लिये कैग ने सर्वेक्षण किया था. पर्यावरण प्रबंधन, स्टेशन, रेलगाड़ी और रेलपथ पर कैग ने अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें रेलवे को व्यापक पर्यावरणीय नीति बनाने, अपशिष्ट प्रबंधन नीति तैयार करने रेलों में पर्यावरण अनुकूल शौचालय लगाने और सरकार एवं लोक लेखा समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए एक प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करने की सिफारिश की गई.

कैग की रिपोर्ट के अनुसार रेलवे स्टेशनों, साइडिंग व गुड्स शेड से गंदा पानी सड़कों, आसपास के इलाकों और मुहल्लों में बहता रहता है और भयंकर गंदगी व प्रदूषण का कारण बना हुआ है. कैग ने अपनी रिपोर्ट में टिप्पणी की कि प्रदूषण निषेध एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 के मुताबिक रेलवे के लिए न केवल ऐसा करना आवश्यक है, बल्कि उसे क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से बाकायदा प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र लेना चाहिए. लेकिन प्रदूषण नियंत्रण में रेलवे विफल रहा है.

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के भिलाई में रेल पथ के किनारे पेट्रोलियम पदार्थ जमा पाए गये हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुच रहा है. जोन के मुख्यालय बिलासपुर का तो और भी बुरा हाल है. बिलासपुर में रेलवे के गंदे जल को बिना किसी उपचार के अरपा नदी में छोड़ दिया जा रहा है. कैग द्वारा इस जल का परीक्षण करवाये जाने पर यह पाया गया कि इसमें तेल तथा ग्रीस मानक स्तर से ज्यादा है. कैग ने टिप्पणी की है कि रेलवे पर्यावरण के प्रति जागरुक नहीं है.

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर को वर्ष 2009-10 में ही जल संसोधन संयंत्र स्थापित करने की अनुमति दे दी गई थी लेकिन उसे आज तक लागू नहीं किया गया है. जगह की कमी का बहाना बना कर बिलासपुर तथा दुर्ग में स्वचालित रेलवे सफाई संयंत्र स्थापित नहीं किया गया है. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे सबसे ज्यादा कमाऊ पूत होने के बावजूद न तो रेल गाड़ी में सफाई के लिये संयंत्र स्थापित करना चाह रहा है, न ही रेलवे के गंदे पानी को साफ़ करने में कोई रूचि ले रहा है

कैग की रिपोर्ट के अनुसार बिलासपुर में रेलवे के कचरे को खुली जमीन में डंप कर दिया जाता है तथा खुले में जलाया जाता है. इस प्रकार स्थापित मानको का उलंघन कर प्रदूषण फैलाया जा रहा है. यह भी पाया गया कि जलाने से पहले प्लास्टिक को अलग भी नहीं किया जाता है.

कैग ने आगाह किया कि कोयले तथा सीमेंट का परिवहन खुली बोगियों द्वारा न किया जाये, इससे वायु प्रदूषण फैलता है. लेकिन बिलासपुर रेलवे जोन में धड़ल्ले से खुली बोगियों मे कोयला और सीमेंट का परिवहन किया जा रहा है.

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