BBC के ‘इंडियाज डाउटर’ के पक्ष में Bollywood

Saturday, March 7, 2015

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अनुराग कश्यप

मुंबई | मनोरंजन डेस्क: बीबीसी के विवादास्पद वृत्तचित्र ‘इंडियाज डाउटर’ के समर्थन में बॉलीवुड के कई निर्देशक तथा अभिनेता-अभिनेत्रियों ने बयान जारी कर अपना समर्थन दिया है. बॉलीवुड हस्तियों 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली में हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर आधारित ‘बीबीसी’ के विवादास्पद वृत्तचित्र ‘इंडियाज डाउटर’ के प्रसारण पर रोक लगाए जाने का विरोध किया है. उन्होंने इसे ‘दूषित मानसिकता’ बताया है. साथ ही ‘इस पर रोक क्यों’ और ‘हम कहां जा रहे हैं?’ जैसे सवाल उठाए हैं. ‘इंडियाज डाउटर’ किसी अज्ञात व्यक्ति ने यूट्यूब पर अपलोड कर दिया था. गृह मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि अदालत से वृत्तचित्र के प्रसारण पर रोक लगाने के आदेश ले लिए गए हैं.

इस प्रतिबंध पर बॉलीवुड के बोमन ईरानी ने कहा “वृत्तचित्र सच की कहानियां हैं. हमें इंडियाज डाउटर वृत्तचित्र की सच्चाई की बजाय उस हकीकत पर शर्मिदा होना चाहिए.” वहीं, पुनीत मल्होत्रा का कहना है “अभी अभी बीबीसी का वृत्तचित्र इंडियाज डाउटर देखा. इसे हमारे समाज को आईना दिखाने और मर्द कैसे सोचता है, ये दिखाने के लिए दिखाया जाना जरूरी है.”

दूसरी तरफ निर्देशक अनुराग बसु ने कमेंट किया “अभी वृत्तचित्र इंडियाज डाउटर देखा. इस पर रोक लगाने की बजाय इसे देखना अनिवार्य किया जाना चाहिए.” अभिनेत्री जेनेलिया डिसूजा ने अपील की है कि, “कृपा करके इंडियाज डाउटर देखें. हमें हम में और हमारे आसपास मौजूद बुराई को समझने व मिटाने की जरूरत है.”

अनुभव सिन्हा ने भी इस फिल्म के समर्थन में कहा, अभी-अभी इंडियाज डाउटर देखकर हटा हूं. उन्हें इस पर रोक क्यों लगानी चाहिए? क्यों?

बीबीसी की फिल्म ‘इंडियाज डाउटर’ के देखे बिना वीर दास ने कहा, मुझे नहीं मालूम कि इस वृत्तचित्र में क्या है. लेकिन ऐसा लगता है कि देश शर्मिदगी की बजाय इस देश की महिलाओं के खिलाफ ज्यादा लड़ रहा है. उन्ही की तरह कबीर बेदी का कहना है पुरस्कार विजेता फिल्म निर्देशक द्वारा निर्मित इंडियाज डाउटर के प्रसारण पर रोक लगाने के सरकार के निर्णय से भारत की छवि को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है.

शिरीष कुंदर का कहना है कि अब उन पर कार्यवाही होगी जिन्होंने यह प्रतिबंधित वृत्तचित्र शेयर किया और जिन्होंने इसे देखा. गोल्डी बहल ने कहा, “इंडियाज डाउटर पर प्रतिबंध क्यों? यह हमारा चौंकाने वाला सच है. पुरुषों की ऐसी मानसिकता पर प्रतिबंध लगाएं.”

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