बिहार चुनाव में काले धन का बोलबाला

Sunday, October 11, 2015

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के.जे. राव-चुनाव आयोग

चुनाव आयोग के पूर्व पर्यवेक्षक ने कहा जाति-धर्म से ऊपर उठकर धनबली या बाहुबली को वोट न दें. चुनाव आयोग के पूर्व पर्यवेक्षक के.जे. राव ने एक साक्षात्कार में कहा कि हालांकि बीते दशक में स्थिति काफी सुधरी है लेकिन फिर भी बिहार में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना आसान काम नहीं है.

सोमवार से शुरू हो रही मतदान प्रक्रिया से पहले राव ने कहा, “लोगों को अपना प्रतिनिधि चुनने में जाति-धर्म से ऊपर उठना चाहिए. उन्हें बाहुबलियों और धनबलियों को मत नहीं देना चाहिए.”

2006 में चुनाव आयोग से सेवानिवृत्त होने वाले राव ने कहा कि इस बार बिहार चुनाव में पैसा पहले से कहीं अधिक असर दिखा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर लोग उम्मीदवारों के बाहुबल या धनबल से नाखुश हैं तो वह किसी भी प्रत्याशी को समर्थन नहीं देने के विकल्प ‘इनमें से कोई नहीं’ का इस्तेमाल कर सकते हैं.

उन्होंने कहा, “यह सिर्फ और सिर्फ लोग ही तय कर सकते हैं कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आधारभूत संरचना चाहिए या फिर अपनी जाति का नेता या बाहुबली.”

राव फाउंडेशन फार एडवांस्ड मैनेजमेंट इलेक्शन के महासचिव हैं. इसकी स्थापना पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई.कुरैशी, जे.एम.लिंगदोह, टी.एस. कृष्णमूर्ति और एन. गोपालस्वामी ने की थी.

राव यहां चुनाव मैदान में उतरे आपराधिक पृष्ठभूमि के प्रत्याशियों की सूची जारी करने के लिए आए हुए हैं.

एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स ने कहा है कि 16 अक्टूबर को होने वाले दूसरे चरण के चुनाव में एक तिहाई उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.

राव ने कहा, “हमने इस बारे में जागरूकता लाने की कोशिश की है कि लोग सोच समझकर मत दें और पैसे, बाहुबल, जाति और धर्म से प्रभावित न हों.”

उन्होंने कहा कि राज्य में हालात सुधरे हैं लेकिन निष्पक्ष चुनाव कराना आज भी चुनौती है. उन्होंने कहा, “इसमें शक नहीं कि राज्य में स्थिति बेहतर हुई है. अब 2005 वाली बात नहीं है जब लोग बाहुबल, बूथ कैप्चरिंग जैसी बातों से डर जाया करते थे.”

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के दखल देने के बाद चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की संख्या में कमी आई है.

राव ने कहा, “राजनीतिज्ञ और नेता चुनाव सुधार की परवाह नहीं करते. पार्टियां बेतहाशा पैसे खर्च करने के लिए आजाद हैं. चुनाव में इनके खर्च पर नजर नहीं रखी जाती. चुनाव खर्च पर पार्टियों को हद बांधनी चाहिए. लेकिन पार्टियां इस मामले में पहल नहीं कर रही हैं.”

उन्होंने कहा कि बीते 20 दिनों में पुलिस ने जितना धन पकड़ा है, उससे साफ है कि बिहार में चुनाव में काले धन का बोलबाला है.

राव ने कहा, “बिहार के ग्रामीण इलाकों में अपने दौरे के आधार पर मैं कह सकता हूं कि पैसे का मतदाताओं पर असर पड़ सकता है.”

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