आय में BJP अग्रणी, CPM फिसड्डी

Wednesday, April 20, 2016

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भाजपा-सीपीएम-पार्टी

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: राष्ट्रीय दलों में आय के मामलें में भाजपा सबसे आगे तथा सीपीएम सबसे पीछे हैं. इससे जाहिर है कि सत्तारूढ़ भाजपा को सबसे ज्यादा चंदा मिला है. वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान भाजपा की आय 970.43 करोड़ तथा सीपीएम का घाटा 59 लाख रुपये का रहा है. कांग्रेस ने अब तक रिपोर्ट नहीं भेजी है. देश में भाजपा, कांग्रेस, माकपा, भाकपा, बसपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सिर्फ छह राष्ट्रीय राजनीतिक दल हैं.

कांग्रेस एकमात्र ऐसी पार्टी है, जिसने चुनाव आयोग को वित्तीय वर्ष 2014-15 की आय की ऑडिट रिपोर्ट नहीं दी है.

भारतीय जनता पार्टी सभी राष्ट्रीय दलों में आय के मामले में शीर्ष पर है. यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने मंगलवार को दी. चुनाव आयोग के 19 नवंबर 2014 के पत्र के अनुसार, सभी राजनीतिक दलों के लिए अपनी आडिट रिपोर्ट का ब्यौरा देना अनिवार्य है.

राजनीतिक दलों के लिए अपने खातों की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट देने की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2015 थी.

एडीआर की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट और बहुजन समाज पार्टी सिर्फ तीन राष्ट्रीय दल ऐसे हैं, जिन्होंने समय पर ऑडिट रिपोर्ट दी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय दलों की आय वित्तीय वर्ष 2013-14 में 920 करोड़ थी जो 2014-15 में बढ़कर 1275.78 करोड़ रुपये हो गई. यह बढ़ोतरी 39 फीसदी है.

राजनीतिक दलों को दान, कूपनों की बिक्री और अंशदान आदि के जरिए पैसा मिलता है.

राष्ट्रीय दलों में भाजपा को वर्ष 2014-15 के दौरान सर्वाधिक 970.43 करोड़ की आय हुई. यह उसकी कुल आय का 76.06 फीसदी है.

वर्ष 2013-14 से 2014-15 के दौरान भाजपा की आय में 44 फीसदी या कहें तो 296.62 करोड़ की बढ़ोतरी हुई.

बसपा की आय 67.31 फीसदी या 45.04 करोड़ बढ़ी है.

भाकपा ने सबसे कम 1.84 करोड़ की आय घोषित की है. यह 2014-15 के दौरान सभी राष्ट्रीय दलों की आय का महज 0.14 फीसदी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय दलों में केवल माकपा ही ऐसी पार्टी है जिसकी आमदनी 24.28 फीसदी यानी 59 लाख कम हुई है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राजनीतिक दलों को करीब-करीब आधा पैसा अज्ञात स्रोतों से मिला है.

एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, अज्ञात स्रोतों हुई आमदनी की राशि वर्ष 2014-15 में 685.36 करोड़ रुपये है जो राजनीतिक दलों की कुल आय का 54 फीसदी है.

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