बायो-टेक्नोलॉजी से प्रकृति सुरक्षित

Friday, June 5, 2015

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बृजमोहन अग्रवाल

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि बायो टेक्नोलॉजी प्रकृति को सुरक्षित रखने के लिए उपयोगी हो सकती है. यह सतत चलने वाली तकनीक है. हमारे वेद पुराणों में विज्ञान की सभी विधाओं का वर्णन है. बायो टेक्नॉलाजी का उल्लेख भी इन प्राचीन ग्रंथों में मिलता है. बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि फसल उत्पादन, पशुपालन, मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए बायो-टेक्नॉलाजी का बेहतर उपयोग किया जा सकता है. छत्तीसगढ़ में इसके लिए एक सुविचारित कार्य-योजना बनाई जाएगी.

बृजमोहन अग्रवाल यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में जैव प्रौद्योगिकी के भविष्य, उद्योगों में इसका उपयोग, रोजगार सृजन तथा कौशल और उद्यमिता विकास के लिए सुझाव आमंत्रित करने के लिए आयोजित विषय विशेषज्ञों की राष्ट्रीय बैठक में अध्यक्षीय उद्बोधन में इस आशय के विचार व्यक्त किए. उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय में भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा एग्री बायोटेक टास्क फोर्स, इनवायरमेन्टल बायोटेक टास्क फोर्स तथा क्रॉप मालीकुलर एक्सपर्ट कमेटी की बैठक विगत एक जून से छह दिन तक आयोजित की गई है. बैठक में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और विषय विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं.

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने बायोटेक्नोलॉजी विभाग को कृषि मंत्रालय के अन्तर्गत रखा है. छत्तीसगढ़ की बायोटेक्नोलॉजी नीति बनाने का काम चल रहा है. ऐसे समय में जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ राजधानी रायपुर में देशभर के लिए बायोटेक्नोलॉजी की कार्ययोजना बनाने जुटे हुए हैं. जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के अनुभव का लाभ छत्तीसगढ़ में बायोटेक्नॉलाजी नीति बनाने में मिलेगा.

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. के. पाटील ने स्वागत भाषण में इस बात पर विशेष जोर दिया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पूर्व में प्रस्तावित बायोटेक्नोलॉजी पार्क के निर्माण को यथाशीघ्र पूर्ण किया जाना चाहिए. विश्वविद्यालय के प्लान्ट मालीकुलर बायोलॉजी एण्ड बायोटेक्नालॉजी विभाग के उन्नयन के लिए राज्य सरकार से भरपूर सहयोग मिल रहा है. बैठक को प्रोफेसर एच.एस. धालीवाल, डॉ. दिनेश के. मारोठिया, एवं कामधेनू विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. यू.के. मिश्रा, डॉ. एन.के सिंह, डॉ. ओंकार एन. सिंह, राजेन्द्र सुराना, डॉ. एस.के. जाधव ने भी संम्बोधित किया.

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