नीतीश की सभा में विरोध क्यों?

Wednesday, September 30, 2015

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नितीश कुमार

नवादा | समाचार डेस्क: मंगलवार को नीतीश कुमार की चुनावी सभा में चप्पल दिखाये गये तथा ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाये गये. जाहिर है कि विरोध करने वाले नीतीश कुमार के विरोधी पक्ष के हैं. पिछले कुछ समय से देश में इस तरह के असहिष्णुता की राजनीति देखने को मिल रही है. लोकसभा चुनाव के समय भी काशी में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अरविंद केजरीवाल के मुख पर कालिख पोतने की कोशिश की गई थी. लोकतंत्र के सबसे बड़े त्यौहार में इस तरह के अलोकतांत्रिक पद्धति से विरोध करना लोकतंत्र के लिये अच्छा शगुन नहीं माना जा सकता है. हालांकि विरोध करना लोकतंत्र का ही हिस्सा है परन्तु रोजाना अखबार पढ़ने वाला कोई आम आदमी भी इस तरह के प्रायोजित विरोध को समझ सकता है.

जातिगत राजनीति में उलझे बिहार का विधानसभा चुनाव का परिणाम क्या होगा यह अभी से कहना कठिन है परन्तु यह तय है कि यदि देश की वास्तविक समस्या महंगाई, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा तथा महंगी चिकित्सा चुनाव का मुद्दा बन जाये तो एनडीए को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. शायद यही कारण है कि इन बातों से ध्यान हटाने के लिये आगे भी इस तरह के घटनाओं को अंजाम दिया जा सकता है.

यह भी सच है कि इसे बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल तथा उत्तरप्रदेश की जनता भी देख व समझ रही है जहां आगे विधानसभा चुनाव होने हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में भारतीय मतदाताओं ने पहली बार अति हाईटेक चुनाव प्रचार को देखा था. लोकसभा का चुनाव प्रचार केवल हाईटेक ही नहीं था वरन् अत्यंत खर्चीला भी था. जिससे समझ में आता है कि इसे आम जनता से लिये गये चुनावी चंदे के बल पर तो हरगिज भी अंजाम नहीं दिया गया था.

जिसकी परिणिति आज देखने को मिल रही है. जितनी भी नीतियां बनाई जा रही है उससे धन्नासेठों की तिजोरियोँ में और इजाफ़ा होना तय है. दूसरी तरफ आम मतदाता अभी भी समझ नहीं पा रहा है कि दालों, प्याज तथा सब्जियों के दाम आसमान क्यों छू रहें हैं.

तमाम नये संकेत भारतीय लोकतंत्र के लिये खतरे की घंटी है. कहने का तात्पर्य यह है कि इससे देश के बहुसंख्य आबादी को लाभ के बजाये नुकसान ही हो रहा है. इसी से समझा जा सकता है कि आने वाले समय में देश की तस्वीर क्या होने जा रही है.

बेशक, नीतीश कुमार का विरोध किया जा सकता है. उनके खिलाफ चुनावी प्रचार किया जा सकता है परन्तु लोकतांत्रिक तरीके से किया जाये तो बेहतर होगा. अन्यथा असहिष्णता की राजनीति का विस्तार होता जायेगा. इसके बाद नीतीश के पार्टी के लोग भी इसे दुहरा सकते हैं. चुनाव लोकतंत्र का सबसे बड़ा त्यौहार है जिसमें लोक तंत्र के उपर होना चाहिये ओछी राजनीति के लिये कोई स्थान नहीं है.

मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को नवादा जिले के वारसलीगंज विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक चुनावी सभा में कुछ विरोधियों का सामना करना पड़ा. सभा में घुस आए चंद विरोधियों ने ‘नीतीश कुमार वापस जाओ’ के नारे लगाए और चप्पल भी दिखाए. इस पर जमकर हंगामा हुआ. हंगामे के कारण मुख्यमंत्री को कुछ देर के लिए अपना संबोधन रोकना पड़ा. इधर, जनता दल युनाइटेड ने भाजपा पर मुख्यमंत्री की सभा में खलल डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि विरोध करने वाले भाजपा के लोग थे.

नीतीश पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मंगलवार को वारसलीगंज के मैदान में एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे, तभी 25-30 की संख्या में पहुंचे मोदी समर्थक ‘नीतीश कुमार वापस जाओ’ तथा ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाने लगे. उन लोगों ने मुख्यमंत्री को काले झंडे और चप्पल दिखाए.

पुलिस के अनुसार, इस घटना के बाद जनता दल युनाइटेड समर्थक विरोध करने वालों के पास पहुंच गए और हाथापाई के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई. अंत में विरोध करने वालों को सुरक्षाबलों ने खदेड़ दिया. इस दौरान मुख्यमंत्री को अपना भाषण रोक देना पड़ा.

वारसलीगंज के थाना प्रभारी संजय कुमार ने बताया कि मामले की छानबीन की जा रही है तथा सीसीटीवी फुटेज खंगाला जा रहा है.

मुख्यमंत्री यहां सत्तारूढ़ महागठबंधन के उम्मीदवार प्रदीप कुमार के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे थे.

इधर, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने भाजपा पर जदयू की चुनावी सभाओं में बाधा डालने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अंदरूनी कलह और बगावत से जूझ रही भाजपा में दरअसल चुनाव का सही तरीके से मुकाबला करने का माद्दा नहीं है. यही कारण है कि वह जदयू की चुनावी सभाओं में खलल डालने का उपाय अपना रही है.

मुख्यमंत्री की सभा में कुछ लोगों द्वारा उनका विरोध करने, काले झंडा दिखाने और हंगामा के मुद्दे पर सिंह ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले भाजपा के लोग थे.

उल्लेखनीय है कि दो सितंबर को समस्तीपुर के विभूतिपुर में पोलीटेक्निक कालेज के उद्घाटन के अवसर पर भी मुख्यमंत्री को कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था. यह भी हो सकता है कि नीतीश कुमार को इस विधानसभा चुनाव में मात मिल जाये परन्तु उससे पहले असहिष्णता का जो बीज बोया जा रहा है उससे राज्य का माहौल ही खराब होने जा रहा है बेहतर नहीं.

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