बिहारी सांसद की गिरफ्तारी करेगा छत्तीसगढ़?

Thursday, June 12, 2014

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रामा किशोर सिंह

रायपुर | संवाददाता: अपहरण के आरोपी बिहारी सांसद की गिरफ्तारी में छत्तीसगढ़ पुलिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं. पिछले 10 साल से भी अधिक समय से बिहार के विधायक और अब माननीय सांसद बन चुके रामा किशोर सिंह को छत्तीसगढ़ पुलिस फरार बताती रही है. रामा किशोर सिंह लोकजनशक्ति पार्टी के सांसद हैं, जो नरेंद्र मोदी की सरकार के गठबंधन एनडीए का हिस्सा है.

अब जबकि इस मामले पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और केंद्रीय मंत्री रहे प्रोफेसर रघुवंश प्रसाद ने चुनाव आयोग समेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है तो पूरे देश में छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो गये हैं.

गौरतलब है कि 29 मार्च 2001 को दुर्ग के व्यवसायी जयचंद बैद का अपहरण किया गया था. कुम्हारी स्थिति पेट्रोल पंप से लौटते समय उनकी मटीज़ कार समेत अपहरण हुआ था और कोई डेढ़ महीने बाद अपहरणकर्ताओं ने उन्हें रिहा किया था.

पुलिस ने बाद में जांच की तो पता चला कि इसमें बिहार का एक बड़ा गिरोह शामिल है, जिसे राजनेताओं का संरक्षण प्राप्त है. इसके बाद पुलिस ने इस मामले में 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया. जिसमें बिहार के तत्कालीन विधायक रामा किशोर सिंह का नाम भी शामिल था. पुलिस के दस्तावेज की मानें तो जिस कार से जयचंद बैद का अपहरण हुआ था, वह रामा किशोर सिंह के ही पास थी.

इस मामले में इन 13 में से 10 लोगों को अपराध क्रमांक 233/01 और सेशन ट्रायल क्रमांक 181/02 में दुर्ग की अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी, 364-ए, 344, 346 और 395 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. जबकि रामाकिशोर सिंह समेत 3 लोग फरार रहे. फरार लोगों में से एक गोपाल को पिछले दिनों गिरफ्तार किया गया, जबकि रामा किशोर सिंह और एक सजायाफ्ता उपेंद्र सिंह की पत्नी आज तक फरार है.

अदालती दस्तावेजों के अनुसार जयचंद बैद अपहरण कांड के इस मामले में पुलिस ने दुर्ग के चतुर्थ अपर न्यायाधीश की अदालत में अभियुक्तों के खिलाफ 17 अगस्त 2003 को अभियोग पत्र संख्या 458डी/2003 दायर किया. उसके बाद 2003 से ही जारी गैर मियादी वारंट के बाद भी छत्तीसगढ़ पुलिस रामा किशोर सिंह को गिरफ्तार नहीं कर पाई.

रामा किशोर सिंह ने अपने को बचाने के लिये 5 जनवरी 2008 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई लगाई लेकिन रामा किशोर सिंह की क्रिमिनल मिसलेनियस पेटिशन संख्या 09/08 और ट्रायल संख्या 181/2 छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति टीपी शर्मा की अदालत ने 28 मार्च 2012 को ही खारिज़ कर दी थी. इसके उलट रामा किशोर सिंह ने इस साल अपने चुनावी हलफनामे में जो जानकारी दी है, उसमें इस मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चलना बताया है. लालू यादव व डाक्टर रघुवंश प्रसाद ने इसी को विरोध का आधार बनाया है.

लेकिन लाख टके का सवाल यह है कि जो रामा किशोर सिंह बिहार विधानसभा की शोभा बढ़ाते रहे और अब रामविलास पासवान की पार्टी लोकजनशक्ति पार्टी के माननीय सांसद बन कर संसद की शोभा बढ़ा रहे हैं, उन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस किन कारणों से गिरफ्तार नहीं कर पाई? हालत ये है कि ज़िले के पुलिस अधिकारी इस पूरे प्रकरण पर बातचीत करने से बच रहे हैं.

अदालत ने कई बार छत्तीसगढ़ पुलिस को फटकारा है और यहां तक कहा है कि पूरे मामले पर हर महीने जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिये हैं लेकिन सारे अदालती आदेश किनारे लगा दिये गये हैं. हालांकि राज्य के गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा का कहना है कि पुलिस रामाकिशोर सिंह की गिरफ्तारी के मामले में कार्रवाई करेगी. लेकिन कब तक, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है.

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