भास्कर की भक्ति में डूबा बिहार

Wednesday, October 29, 2014

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बिहार

पटना | एजेंसी: लोक आस्था और सूयरेपासना का पर्व छठ को लेकर पटना सहित पूरा बिहार भक्तिमय हो गया है. चार दिवसीय इस अनुष्ठान के दूसरे दिन मंगलवार शाम व्रतियों ने खरना किया जबकि बुधवार शाम गंगा के तट और विभिन्न जलाशयों में पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य अर्पित किया जाएगा. छठ पर्व को लेकर पूरा बिहार भक्तिमय हो गया है. मुहल्लों से लेकर गंगा तटों तक यानी पूरे इलाके में छठ पूजा के पारंपरिक गीत गूंज रहे हैं. राजधानी पटना की सभी सड़कें दुल्हन की तरह सज गई हैं, जबकि गंगा घाटों पर पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की गई है. राजधानी की मुख्य सड़कों से लेकर गलियों तक की सफाई की गई है. आम से खास लोग सड़कों की सफाई में व्यस्त हैं. हर कोई छठ पर्व में हाथ बंटाना चाह रहा है.

पटना में कई पूजा समितियों द्वारा भगवान भास्कर की मूर्ति स्थापित की गई है. पूरा माहौल छठमय हो उठा है. कई स्थानों पर तोरण द्वारा लगाए गए हैं तो कई पूजा समितियों द्वारा लाइटिंग की व्यवस्था की गई है.

पटना में जिला प्रशासन द्वारा छठ पर्व के मद्देनजर नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है. पटना में गंगा तट के कई घाटों के समीप व्रतियों को अघ्र्य देने के लिए अस्थायी तालाब बनाए गए हैं, जबकि गंगा की धारा दूर होने के कारण कुछ घाटों पर पीपा पुल बनाया गया है.

प्रशासन ने 40 से ज्यादा घाटों को असुरक्षित घोषित कर दिया है जिसमें व्रतियों को नहीं जाने की चेतावनी दी जा रही है, जबकि अत्यधिक गहराई वाले क्षेत्रों की बैरेकेटिंग कर दी गई है.

बिहार राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय ने बताया कि पटना सहित पूरे राज्य में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं. पटना के गंगा घाटों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है. पटना की यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए गए हैं.

गौरतलब है कि पटना सहित राज्य के विभिन्न इलाकों से लोग गंगा तट पर छठ करने पहुंचते हैं. मुजफ्फरपुर, सासाराम, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर, औरंगाबाद सहित सभी जिलों के गांवों से लेकर शहर तक लोग छठ पर्व की भक्ति में डूबे हैं.

बिहार के औरंगाबाद जिले के प्रसिद्घ देव सूर्य मंदिर परिसर में हजारों लोगों की भीड़ भगवान भास्कर को अघ्र्य देने के लिए पहुंची है.

उल्लेखनीय है कि मंगलवार शाम व्रतियों ने भगवान भास्कर की अराधना की और खरना किया. खरना के साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास प्रारंभ हो गया. खरना का प्रसिद्घ प्रसाद गुड़ की बनी खीर और रोटी का प्रसाद पाने के लिए लोग देर रात तक घरों से निकलते दिखे.

पर्व के तीसरे दिन बुधवार को छठव्रती शाम को नदी, तालाबों सहित विभिन्न जलाशयों में पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य अर्पित करेंगे. पर्व के चौथे और अंतिम दिन यानी गुरुवार को उदीयमान सूर्य को अघ्र्य देने के साथ ही श्रद्घालुओं का व्रत समाप्त हो जाएगा. इसके बाद व्रती अन्न-जल ग्रहण कर ‘पारण’ करेंगे.

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