संगठन व सरकार हो अहंकार शून्य: भागवत

Wednesday, February 18, 2015

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मोहन भागवत

कानपर | समाचार डेस्क: आरएसएस के सरसंघचालक मोहनराव भागवत ने कानपुर में मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक जीवन में चाहे संगठन हो, व्यक्ति हो या सरकार, सभी को अहंकार शून्य होना चाहिए. अहंकारी व्यक्ति या संगठन को एक न एक दिन गढ्ढे में गिरना ही पड़ेगा. संघ प्रमुख भागवत ने संगठन के पदाधिकारियों को सलाह देते हुए कहा कि संगठन व सरकार का निर्णय देशहित में है या नहीं, इसका ख्याल दोनों पक्षों को रखना होगा. संगठन व सरकार के गलत निर्णय पर दोनों को एक-दूसरे के सामने झुकना ही चाहिए.

भागवत ने ये बातें मंगलवार को संघ तथा समवैचारिक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों को प्रबोधन करते हुए कही.

उन्होंने कहा कि यह ‘विचार परिवार’ परिवर्तन के लिए कार्य कर रहा है, इसलिए अपने-अपने क्षेत्र में विजेता बनना आवश्यक है. अगर श्रम नीति, कृषि नीति, शिक्षा नीति, स्वदेशी, सुरक्षा समेत अन्य मामले में सरकार का निर्णय देशहित में गलत है तो इसका विरोध अवश्य किया जाना चाहिए.

संघ प्रमुख ने कहा कि कोई भी सरकार सभी वादे पूरे नहीं कर सकती, फिर भी मांगें उठती रहनी चाहिए.

सुरक्षा मामले में संघ प्रमुख ने कहा, “इस क्षेत्र में सुरक्षा तकनीकी को अत्याधुनिक बनाने के लिए एफडीआई जरूरी है. सुरक्षा विशेषज्ञों की मानें तो वर्तमान में हमारे पास सुरक्षा की जो तकनीकी है, वह 60 साल पुरानी है. ऐसे में हम अपने देश की सुरक्षा ठीक प्रकार से नहीं कर सकते.”

संघ प्रमुख ने कहा कि प्रकृतिप्रद नीतियां ही लंबे समय तक चलायमान होती है. भारतीय संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को लेकर निरंतर आगे बढ़ी है और उसी मूल तत्व के आधार पर विश्व का कल्याण संभव है.

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दुनिया से 70 वर्षो में साम्यवाद चला गया, उसी प्रकार आने वाले पांच वर्षो मंे पूंजीवाद भी खत्म हो जाएगा.

उन्होंने सभी समवैचारिक संगठनों (अभाविप, भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता पार्टी) को अपने सदस्य संख्या बढ़ाने के साथ ही प्रतिबद्ध और सक्रिय कार्यकर्ताओं में इजाफा करने पर बल दिया.

उन्होंने कहा कि सक्रियता के साथ जब प्रतिबद्धता बढ़ती है तो समाज उसका अनुसरण करता है. सभी जनसंगठनों को आगामी वर्षो में गांवों तक पहुंचने का आह्वान किया.

उन्होंने सभी पदाधिकारियों को अपने-अपने संगठनों में सामाजिक समरसता पर बल देने को कहा. भागवत ने कहा कि सामाजिक समरसता, स्वदेशी, महिला सशक्तीकरण, सुरक्षा, ग्राम विकास जैसे विषय सभी संगठनों के मतलब का विषय होना आवश्यक है. इसलिए सभी संगठनों में सभी वर्गो के लोग और मातृ-शक्तियों की अपेक्षित संख्या में सहभागिता होना जरूरी है.

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर संघ प्रमुख ने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार संसद में कानून बनाए. उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर मामले में संत उच्च्चाधिकारी समिति जो तय करेगी, वही उनके संगठन को मान्य होगा.

संघ प्रमुख ने अंत में अपने संगठन की मूल भावना को दोहराते हुए कहा, “भारत हिंदू राष्ट्र है और आगे भी रहेगा. अंग्रेज भी मानते थे कि यह हिंदू राष्ट्र है. सरकार घोषणा करे या न करे, यह हिंदू राष्ट्र है. राष्ट्र सनातन होता है.”

उल्लेखनीय है कि संघ प्रमुख भागवत अपने वार्षिक प्रवास पर कानपुर पहुंचे हैं. इस प्रवास के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के संघ समेत सभी समवैचारिक संगठनों की बैठक बिठूर में महाराणा प्रताप तकनीकी संस्थान में 14 फरवरी से चल रही है.

संघ प्रमुख भागवत 18 फरवरी को वाराणसी पहुंचेंगे. 19 को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री पर लिखित एक पुस्तक का विमोचन करेंगे.

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