एनालजीन पर भारत में बैन

Friday, June 28, 2013

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एंटीबायोटिक से प्रतिरोध क्षमता

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: दर्द निवारक तथा तेज बुखार की दवा एनालजीन को स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत में प्रतिबंधित कर दिया है. इसी के साथ अवसाद की दवा डेनक्सीट व डायबीटिज की दवा पायोग्लीटाजोन को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है. इन तीनों दवाओं को इनसे होने वाले दुष्परिणाम के कारण प्रतिबंधित किया गया है. देश में इनके बदले में दी जाने वाली सुरक्षित दवाएं उपलब्ध हैं.

संयुक्त संसदीय समिति ने तो एक वर्ष पहले ही अपनी अनुशंसा में कह दिया था कि एनालजीन को भारत में प्रतिबंधित कर दिया जाये. इसके सेवन से एक प्रकार का रक्त रोग एग्रेनुलूसाइटिस होता है. जिसमें मानव के खून से सफेद रक्त कणिकाओं का क्षरण होने लगता है. इसके पश्चात उस व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता का हास होने लगता है. विदेशो में करीब-करीब सभी देशो में एनालजीन प्रतिबंधित है, बावजूद इसके भारत में यह धड़ल्ले से बेचा जाता है.

स्वयं जिस देश में एनालजीन का आविष्कार हुआ था, उस देश जर्मनी में यह प्रतिबंधित है. इसका आविष्कार जर्मन दवा कंपनी हेक्स्ट ने 1920 में किया था. 1970 के बाद से एक-एक कर कई देशों ने इसे अपने यहां प्रतिबंधित कर दिया था. भारत में लंबे समय से मांग की जा रही थी कि एनालजीन को प्रतिबंधित कर दिया जाये, जो अब जाकर संभव हुआ है.

डायबीटिज की दवा पैयोग्लीटाजोन से शरीर में विशेषकर हृदय में पानी जमने लगता है. इस कारण इसे भी प्रतिबंधित दवाओं की सूची में डाल दिया गया है. अवसाद की दवा डेनक्सीट तो डेनमार्क में ही प्रतिबंधित है. वैसे भी भारतीय कानून के अनुसार यदि कोई दवा अपने ही देश में प्रतिबंधित हो तो उसे भारत में नही बेचा जा सकता. जाहिर है, सरकार के ताजा कदम का स्वास्थ्य जगत में स्वागत किया जा रहा है.

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