मानेकशॉ: बांग्लादेश युद्ध की कहानी

Monday, June 8, 2015

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सैम बहादुर मानेकशॉ

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का हीरो कौन था बंगबंधु या सैम बहादुर मानेकशॉ यह बहस का विषय हो सकता है. इतना तय है कि मानेकशॉ की कुशल सैन्य रणनीति के बल पर ही 1971 के भारत-पाक युद्ध में 13 दिनों में भारतीय सेना ने पाक सेना के छक्के छुड़ा दिये थे. ढाका से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक ‘स्टार’ ने 29 जून 2008 को अपने संपादकीय में लिखा था ” पाकिस्तान को हराकर उसका बंटवारा कराने के लिए मानेकशॉ के योगदान के लिए याद करते हैं. लेकिन बांग्लादेश के लोग उन्हें एक ऐसे मित्र के रूप में हमेशा करते रहेंगे, जो उनकी जरूरत के समय सबसे ज्यादा काम आए थे. मानेकशॉ 1971 में भारत-पाक युद्ध के समय भारत के सेना प्रमुख थे. उनके मार्गदर्शन में लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह के नेतृत्व में भारतीय सेना ने 3 से 16 दिसंबर 1971 तक चले सैनिक अभियान में पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों को आत्मसमर्पण करने पर बाध्य कर दिया. इसके बाद ही पूर्वी पाकिस्तान के स्थान पर बांग्लादेश नामक स्वतंत्र राष्ट्र का जन्म हुआ.”

एसएचएफजे मानेकशॉ को इसके बाद भारतीय सेना का फील्ड मार्शल बना दिया गया. सुनिये मानेकशॉ की जुबानी युद्ध की कुछ कहानी-

Indian Army Stories of the Indo-Pak War 1971 by sam manekshaw

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