बलरामपुर में नौकरी का फर्जीवाड़ा

Thursday, September 12, 2013

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ठगी

बलरामपुर | संवाददाता: बलरामपुर जिला मुख्यालय में संयुक्त भर्ती अभियान के तहत हो रही भर्ती को मोहरा बनाकर फर्जी नियुक्ति पत्र देकर बेरोजगारों से लाखों रूपये वसूलने के मामले में बलरामपुर पुलिस ने आरोपी युवकों बडकीमहरी निवासी शीतल सिंह व गोबरा निवासी देवचंद को गिरफ्तार किया है. मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफतार करते हुए उनके पास से लगभग साढ़े छ: लाख रूपये भी जŽप्त किए हैं.

मामले में दोनों आरोपियों द्वारा क्षे˜त्र के बेरोजगार युवकों को चपरासी की नौकरी देने के नाम पर प्रति व्यक्ति एक से डेढ़ लाख की वसूली की ‰थी. मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्राम टांगमहरी निवासी दुर्गा कुमार, संदीप सिंह, उमेश सिंह व संद”ज्ज वर्मा, सूरजदेव ठाकुर को कलेक्टर के हस्ताक्षर से जारी नियुक्ति पत्र मिला.

इन सभी को जिले के विभिन्न प्राथमिक स्कूलों में चपरासी के पद पर नियुक्त किया गया था. नियुक्ति पत्र लेकर युवक जब अपने ’वाईनिंग देने बीईओ कार्यालय पहुंचे तो नियुक्ति पत्र देखकर बीईओ डीके गुप्ता को संदेह हुआ उन्होंने तत्काल इसकी सूचना सहायक आयुक्त डीआर भगत को दी. आयुक्त ने इस संबंŠध में तˆकाल थाने में प्रकर‡ण दर्ज करवाते हुए जांच के लिए मामला पुलिस को सौंप दिया.

आवेदकों द्वारा बताए गए संदेहियों पर पुलिस की पूछताछ में बडकीमहरी निवासी शीतल सिंह व गोबरा निवासी देवचंद को लेकर पुलिस ने पूछताछ की तो आरोपियों ने रूŒपये लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र देने का जुर्म स्वीकार कर लिया. आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने शीतल के ƒघर दबिश देकर लगभग साढ़े छ: लाख रूपये भी जप्त कर लिया.

आरोपियों ने मामले में स्वीकार करते हुए यह भी बताया कि अभी तक उ‹होंने विभि‹‹न्न दलालों के माŠयम से भोले-भाले 57 ग्रामी‡ण बेरोजगार युवाओं से नौकरी के नाम पर एक से डेढ़ लाख रूपये तक वसूली कर फर्जी नियुक्ति आदेश जारी किया.

फर्जी नियुक्ति के संबंŠध में मामला उजागर हो जाने की जानकारी मिलते ही एक अ‹न्य आरोपी अनिल ठाकुर ने जहर खाकर मरने का प्रयास किया. मगर उसे तत्काल स्वास्थ्य केंद्र लाकर उपचार कर जिला चिकिˆसालय अम्बिकापुर रेफर किया गया जहां उसका इलाज किया जा रहा है.

इस संबंŠध में थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी शीतल सिंह एवं देवचंद्र के विरूद्ध अपराŠध दर्ज किया गया. साथ ही अनिल ठाकुर पर स्वस्थ होने तक नजर रखी जा रही है. ताकि स्वस्थ होकर फरार न हो सके, आरोपी ने जिला कलेक्टर के हस्ताक्षर एवं नियुक्ति पत्र को स्केनिंग कर दिनांक बदल कर नियुक्ति आदेश माŠध्यमिक शाला के जगह प्राथमिक शाला में नियुक्ति आदेश जारी किया, नियुक्ति आदेश में कई ˜त्रुटियां पाई गई है.

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