दमा की दवा का दाम कम होगा

Friday, July 19, 2013

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एंटीबायोटिक से प्रतिरोध क्षमता

दिल्ली । संवाददाता : सर्वोच्य न्यायालय के निर्णय के अनुसार अब डोक्सोफाइलिन का मूल्य कम हो जायेगा. डोक्सोफाइलिन दमा की ही दवा है लेकिन अब तक इसे मूल्य नियंत्रण के दायरे से बाहर माना जाता था. सर्वोच्य न्यायालय ने माना है कि डोक्सोफाइलिन वास्तव में दमा की दवा थीओफाइलिन का ही एक रूप है. इस कारण इस पर भी मूल्य नियंत्रण लागू होगा. यह दमा के मरीजों के लिये अच्छी खबर है.

थीओफाइलिन के दस गोली का मूल्य 3 रुपये है जबकि डोक्सोफाइलिन के दस गोली का मूल्य 80 से 110 रुपये है. इस निर्णय से दवा कंपनियों को डोक्सीफाइलिन का मूल्य सरकार द्वारा तय किये गये मूल्यों
पर ही बेचना पड़ेगा. जब से सरकार ने थीओफाइलिन को मूल्य नियंत्रण के दायरे में लिया है दवा कंपनिया मुनाफा कमाने के लिये इसका उत्पादन कम कर दिया था. इस समय तमाम दवा कंपनियों का जोर
अधिक मूल्य के डोक्सोफाइलिन को बेचने का है. अब इन्हे दमा की इस दवा का मूल्य भी घटाना पड़ेगा.

इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने 19 मई 2010 तथा 15 मार्च 2011 को निर्णय दिया था कि केन्द्र सरकार डोक्सोफाइलिन के मूल्यों पर नियंत्रण लागू नही कर सकती है. लेकिन सर्वोच्य न्यायालय के जस्टिस
जी एस सिंघवी तथा एस जे मुखोपाध्याय की बेंच ने इसे थीओफाइलिन का ही एक रूप माना है तथा मूल्य नियंत्रण लागू करने के योग्य माना है.

इस निर्णय के पश्चात् अब रैनबैक्सी, ज़ाइडस कैडिला, मैक्लायड, लुपिन, डा. रेड्डीज तथा मैनकाइंड को अपने दवाओं का मूल्य कम करना पड़ेगा. जिसका सीधा लाभ मरीजो को मिलेगा. ज्ञात्वय रहे कि हमारे देश में प्रति वर्ष करीब 61 करोड़ रुपये का डोक्सोफाइलिन बिकता है.

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