भुल्लर के पक्ष में आया एमनेस्टी

Saturday, April 13, 2013

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एमनेस्टी इंटरनेशनल

नई दिल्ली | संवाददाता: मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने देवेंदर पाल सिंह भुल्लर को फांसी दिये जाने के फैसले का विरोध किया है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आशंका जताई है कि देवेंदर पाल सिंह भुल्लर को तुरंत फांसी दी जा सकती है. संगठन ने आम लोगों से अपील की है कि वे देवेंदर पाल सिंह भुल्लर की फांसी की सजा की माफी के लिये राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखें.

गौरतलब है कि आतंकवादी देविंदर पाल सिंह भुल्लर की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की पीठ ने भुल्लर की फांसी की सजा को इस आधार पर रोकने से मना कर दिया कि उसकी दया याचिका 8 साल तक राष्ट्रपति के पास लंबित रही है.

सितंबर 1993 के दिल्ली धमाका मामले के दोषी भुल्लर ने एक याचिका दायर कर अपनी मौत की सजा को उम्र कैद में बदलने की मांग की थी. अदालत से उसने गुहार लगाई थी कि 14 जनवरी, 2003 को दायर उसकी दया याचिका का निस्तारण करने में अनावश्यक देरी की गई और इसमें 8 साल बाद 25 मई को राष्ट्रपति ने उसकी याचिका खारिज कर दी. भुल्लर का तर्क था कि इन 8 सालों में मौत के खौफ के कारण मेरा दिमागी संतुलन बिगड़ गया है.

भुल्लर ने 11 सितंबर, 1993 में हुए एक कार धमाका कर कांग्रेस के युवा नेता मनिंदरजीत सिंह बिट्टा को मारने की कोशिश की थी. इस धमाके में 9 लोग मारे गये थे. इसके बाद भुल्लर जर्मनी पहुंच गया जहां से 1995 में भुल्लर को भारत प्रत्यर्पित किया गया. 25 अगस्त, 2001 को निचली अदालत ने उसे दिल्ली कार धमाके का दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई. इसके बाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी सजा को बरकरार रखा था. जिस पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने फिर से मुहर लगा दी है.

इधर मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि 20 सालों के बाद भुल्लर को फांसी की सजा देना अमाननीय होगा. संगठन ने कहा कि मुकदमे की शुरुआत में भुल्लर को वकील तक उपलब्ध नहीं था. उन्हें पुलिस के सामने अपराध स्वीकार करने की वजह से दोषी ठहरा दिया गया था. बाद में उन्होंने कहा था कि उन्होंने वह बयान पुलिस के दबाव में दिया था. ऐसे में भारतीय न्यायालय को फिर से पूरे मामले पर विचार करना चाहिये.

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