किसके माथे भाजपा अध्यक्ष का ताज ?

Tuesday, July 8, 2014

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मोदी और अमित शाह

नई दिल्ली | संवाददाता: भाजपा संसदीय बोर्ड अमित शाह के नाम की घोषणा कर सकती है. राजनाथ सिंह के गृह मंत्री बनने के साथ ही अटकलों का दौर जारी है कि कौन, भाजपा का अगला अध्यक्ष होगा. एक व्यक्ति एक पद के फार्मूले के अनुसार तय है कि राजनाथ सिंह को पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ेगा. वैसे भी देश के गृह मंत्री रहते उनके लिये पार्टी अध्यक्ष की दोहरी जिम्मेदारी का पालन करना मुश्किल काम है.

संसद के बजट सत्र चलने के दौरान बुधवार को हो रहे पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में अमित शाह के नाम की घोषणा पार्टी अध्यक्ष के रूप में कर दी जायेगी, ऐसा दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में तय माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि संघ ने भी अमित शाह के नाम के लिये हामी भर दी है. एक दिन पहले मोदी के करीबी राम माधव को संघ की ओर से भाजपा की जिम्मेदारी दिये जाने से साफ है कि पार्टी अध्यक्ष भी मोदी की पसंद का ही होगा.

अमित शाह न केवल मोदी के पुराने खास सिपहसलार हैं बल्कि उन्होंने अपनी काबिलियत का लोहा लोकसभा चुनाव के समय सबको मनवा दिया है. अन्यथा क्या यह आसान बात है कि जिस उत्तर प्रदेश की राजनीति सपा-बसपा के ईर्द-गिर्द घूमती रहती थी वहीं से भाजपा ने अपने दम पर 80 में से 71 लोकसभा की सीटें जीती है. इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश में भाजपा को 42 फीसदी मत मिले हैं. वहीं सपा को 22 तथा बसपा को 19 फीसदी मत ही मिल पाये हैं.

एक वर्ष पूर्व नरेन्द्र मोदी को जब भाजपा का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था तब मोदी ने अमित शाह को उत्तर प्रदेश का पार्टी महासचिव बनवाने में देर नहीं की थी. मोदी के उसी सफल रणनीति का नतीजा है कि अमित ने लोकसभा चुनाव में उनके झोली में उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा सीटें दिलवाई. उत्तर प्रदेश से जीत ने ही भाजपा को अपने बूते पर केन्द्र में सरकार बनाने का मौका दिया है.

इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि अमित शाह के बगैर इस करिश्मा को कर दिखाने का माद्दा और किसी में नहीं है. गौर करने वाली बात यह है कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पहले ही उनके चुनावी सभाओं में अमित शाह ने लाखों की भीड़ हर बार जमा करके मोदी के पक्ष में लहर को दिखाया था. जाहिर है कि उस समय इतनी भीड़ और किसी राजनेता के चुनावी सभा में जमा नहीं हो रही थी.

लोकसभा चुनाव के मतदान के समय से तय माना जा रहा था कि मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही अमित शाह को पीएमओ में राज्य मंत्री बना दिया जायेगा. जब मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण हुआ तो यह स्पष्ट हो गया कि अमित शाह को मंत्री मंडल में नहीं बल्कि पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण पद से नवाजा जायेगा. उसी के साथ अटकलों का दौर शुरु हो गया कि अमित शाह को भाजपा का अध्यक्ष बनाया जाना केवल समय की बात है.

हालांकि, इस बीच जेपी नड्डा का नाम भी अध्यक्ष पद के लिये सामने आया था परन्तु सूत्रों का कहना है कि संघ ने अमित शाह के नाम पर सहमति दे दी है. इसके अलावा इसी वर्ष महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में भाजपा को अमित शाह जैसे सफल रणनीतिकार की जरूरत है जिन्हे असंभव को संभव बनाने में महारत हासिल है.

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